
पटना। आलमगंज थाना क्षेत्र अंतर्गत बिस्कोमान कॉलोनी के प्यारेलाल बाग निवासी विजय कुमार पांडेय ने भूमि विवाद से जुड़े एक गंभीर मामले को लेकर प्रेस कॉन्फ्रेंस कर शासन-प्रशासन से सुरक्षा और न्याय की गुहार लगाई है। उन्होंने कहा कि उनकी मां की पुश्तैनी जमीन पर जबरन कब्जा करने की साजिश रची जा रही है और इसी विवाद में उनकी जान पर कई बार जानलेवा हमला हो चुका है। पांडेय ने आरोप लगाया कि पूर्व में उन्हें चार गोलियां मारी गई थीं, लेकिन इलाज के बाद वे किसी तरह बच सके।
विजय कुमार पांडेय ने बताया कि शीतला मंदिर के पास स्थित उनकी मां के नाम की जमीन लंबे समय से विवादित है और मामला न्यायालय में विचाराधीन है। इसके बावजूद अखिलेश और हेमलता नामक व्यक्तियों ने इस जमीन के फर्जी कागजात तैयार कर पहले अर्जुन सिंह और लल्लू मेहता को बेच दिया। वर्ष 2019 में जब उक्त जमीन पर जबरन कब्जा करने की कोशिश की गई, तो विवाद हिंसक हो गया और कई राउंड गोलियां चलीं। जबकि पांडेय खुद चार गोलियां लगने से गंभीर रूप से घायल हो गए। उन्होंने बताया कि इस घटना में उनके दोस्त सचिन को 2 गोली लगी और अजय मेहता की जान चली गई थी। गंभीर हालत में उन्हें राजेश्वरी अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां इलाज के बाद उनकी जान बच पाई।
पांडेय ने आरोप लगाया कि अब अर्जुन सिंह का बेटा ललित भूषण जमीन पर कब्जा जमाने के लिए उन्हें लगातार धमका रहा है। वह अपने गुंडा प्रवृत्ति के दोस्तों के साथ मिलकर हमला करवा रहा है और झूठे केस में फंसाने की कोशिश कर रहा है। उन्होंने कहा कि एक झूठे मुकदमे के जरिए उन्हें पहले जेल भी भेजा जा चुका है और उसी दौरान ललित भूषण ने विवादित जमीन पर जबरन कब्जा कर लिया। इस संबंध में थाने में शिकायत करने के बावजूद उन्हें अब तक कोई ठोस सुरक्षा नहीं मिल पाई है।
विजय कुमार पांडेय ने कहा कि उनके पास जमीन के असली दस्तावेज मौजूद हैं, इसी वजह से आरोपी उन्हें रास्ते से हटाना चाहता है। हाल के दिनों में उन पर फिर हमला किया गया और गली के कुछ असामाजिक तत्वों के साथ मिलकर जान से मारने की कोशिश की गई। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि उनकी लगातार रेकी की जा रही है और उनके घर की ओर कैमरा लगाकर उनकी गतिविधियों पर नजर रखी जा रही है, जिससे उनकी और परिवार की सुरक्षा पर गंभीर खतरा मंडरा रहा है।
प्रेस कॉन्फ्रेंस के माध्यम से विजय कुमार पांडेय ने राज्य सरकार और पुलिस प्रशासन से मांग की कि उन्हें तत्काल सुरक्षा उपलब्ध कराई जाए, निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की जाए और जब तक न्यायालय का अंतिम फैसला नहीं आ जाता, तब तक विवादित जमीन को खाली कराया जाए। उन्होंने कहा कि यदि समय रहते प्रशासन ने हस्तक्षेप नहीं किया तो किसी भी समय कोई बड़ी अनहोनी हो सकती है, जिसकी जिम्मेदारी पूरी तरह प्रशासन की होगी।

