
मधुबनी : मधेपुर रहुआ संग्राम गांव में आनंद मोहन सिंह ने कहा कि हमारे पीढ़ियों ने देश के लिए बड़ी अपनी कुर्बानी दी है .लोकतंत्र में जो कानून बनाए गए हैं अगर किसी वजह से यह कानून अगर कानून बनाने वाले पर भी उल्टा पर जाए तो इसे स्वीकार भी करनी चाहिए. हमारी पत्नी लोक सभा में सांसद हैं और हमारा बेटा विधायक है जो राज्य में कानून बनाता है. फिर भी कानून जब मुझ पर आ पड़ा तो मैं कानून का सम्मान करते हुए अपनी सजा भी काटी है .सूरज नारायण सिंह बाबू किसी जाती धर्म से नहीं वो अपनी वीरता और अपने देशप्रेम को लेकर अपनी जान गवां देने वाले वीर शाहिद के लिए जाने जाते हैं.सूरज नारायण सिंह उस समय उन अंग्रेजों से लोहा ले रहे थे जिनके पास अत्याधुनिक हथियार थे लेकिन सूरज बाबू के पास कोई हथियार नहीं थी सिर्फ बांस की लाठी थी. फिर भी वो अंग्रेजों से हमेशा लोहा लेते रहे. सूरज बाबू ने हनुमान नगर जेल को तोड़ कर लोहिया और जेपी बाबू को जेल से निकाला था . उन्होंने अपना नौ हजार बीघा जमीन गरीबों में दान कर दिया था .

