
सहरसा :पश्चिम बनगांवमें मनाई जाने वाली घुमौर होली पुरे बिहार में महशुर है .बनगांव की होली ब्रज की होली के जैसी मनाई जाती है.यहां की होली एक दिन पहले ही होली मनाई जाती है. सैकड़ों की संख्या में मौजूद लोग एक-दूसरे के कंधे पर सवार होकर जोर आजमाइस करते हुए दिखाई देते है .संत लक्ष्मी नाथ गौसाई ने इस होली की शुरुआत की थी.यहाँ की मान्यता है कि इसकी परंपरा भगवान श्री कृष्ण के काल से चली आ रही है.बनगांव में घुमौर होली की शुरुआत 18वीं सदी में यहां के प्रसिद्ध संत लक्ष्मी नाथ गौसाई बाबाजी ने की थी.बिहार की सबसे बड़ी आबादी और तीन पंचायत वाले बनगांव की होली की देश में अलग ही सांस्कृतिक पहचान हैऔर यहां के ग्रामीण भरपूर घूमोर होली का आनंद लेते हैं.यहाँ सभी जाति-धर्म के लोग मिलकर होली मानते हैं .200 साल पहले महान संत और आराध्य देव गोंसाई लक्ष्मीनाथ द्वारा व्यवस्थित की गई घूमोर होली ब्रज की होली की तरह अपने आप में विशिष्ट स्थान रखती है. इस गांव के लोग देश प्रदेश चाहे कही भी बसे हो वो होली पर से पहले अपने गांव चले आते हैं ताकि हर्षोल्लास के साथ धूमधाम से होली मना सके.

