बिहार दिवस पर विजयलक्ष्मी की भरतनाट्यम प्रस्तुति ने बांधा शमां, शक्ति आराधना और देशभक्ति का अद्भुत संगम

बिहार दिवस आयोजित के अंतिम दिन पटना के गांधी मैदान के पास मौजूद श्री कृष्ण मेमोरियल हॉल में सांस्कृतिक संध्या का आयोजन किया गया। इसके भव्य और आध्यात्मिक वातावरण में योजना एवं विकास विभाग की अपर मुख्य सचिव डॉ. एन विजयलक्ष्मी की भरतनाट्यम प्रस्तुति आकर्षण का मुख्य केंद्र रही। उनकी प्रस्तुति ने अलग ही शमां बांध दिया, जिसमें शक्ति, अराधना और देशभक्ति का अनोखा संगम देखने को मिला।डॉ. विजयलक्ष्मी का व्यक्तित्व प्रशासनिक दक्षता और सांस्कृतिक प्रतिबद्धता का अद्वितीय उदाहरण है। बचपन से ही भरतनाट्यम के प्रति उनका गहरा रूझान रहा है, जिसे उन्होंने अपने व्यस्त प्रशासनिक दायित्वों के साथ निरंतर साधना के तौर पर बनाए रखा। विभिन्न मंचों पर उनकी प्रस्तुतियां भारतीय शास्त्रीय कला की गरिमा को सशक्त रूप से प्रस्तुत करती रही हैं।

उन्होंने चैत्र नवरात्रि के इस पावन पर्व पर मां दुर्गा को समर्पित विशेष प्रस्तुति दी। उनकी एकल नृत्य प्रस्तुति श्री राजा राजेश्वरी अष्टकम पर आधारित थी, जिसकी रचना आदि शंकराचार्य ने की थी। इसके बाद अंबा स्तुति और मां दुर्गा स्तुति की भावपूर्ण अभिव्यक्ति ने पूरे सभागार को भक्तिमय वातावरण में सराबोर कर दिया। यह प्रस्तुति शक्ति उपासना और सांस्कृतिक समर्पण का अद्भुत संगम रहा, जिसे दर्शकों ने अत्यंत सराहा, सभी दर्शकगण नवरात्रि के पावन अवसर पर भक्तिमय माहौल में सराबोर हो गए ।कार्यक्रम की शुरुआत वंदे मातरम् की 150वीं वर्षगांठ के उपलक्ष्य में विशेष समूह नृत्य की विशेष प्रस्तुति से हुआ। इसमें डॉ. विजयलक्ष्मी स्वयं भी सहभागी रहीं और साथी कलाकारों का मार्गदर्शन करते हुए उन्होंने अलग तरह की प्रस्तुति से सभी को सम्मोहित कर दिया।

इस आयोजन में केंद्र सरकार के दिशा-निर्देशों के अनुरूप वंदे मातरम् के पूर्ण संस्करण के पाठ की प्रस्तुति की गई। इसका संपूर्ण ध्यान रखते हुए उन्होंने कला प्रेमी के साथ साथ एक अच्छे लोक सेवक का भी नायाब उदाहरण पेश किया।उल्लेखनीय है कि डॉ. विजयलक्ष्मी पूर्व में भी बुद्ध महोत्सव, राजगीर महोत्सव, बिहार दिवस समारोह तथा अन्य राज्य स्तरीय सांस्कृतिक आयोजनों में अपनी प्रभावशाली प्रस्तुतियां दे चुकी हैं। विशेष रूप से उन्होंने पिछले वर्ष बिहार दिवस के अवसर पर यशोधरा पर आधारित अपनी नृत्य प्रस्तुति से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया था। इन मंचों के माध्यम से उन्होंने बिहार की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को व्यापक पहचान दिलाई है।इस सांस्कृतिक प्रस्तुति के दौरान बड़ी संख्या में गणमान्य अतिथि, अधिकारी, कलाकार एवं नागरिक उपस्थित रहे। कार्यक्रम ने न केवल बिहार दिवस के उत्सव को गरिमा प्रदान की, बल्कि कला और संस्कृति के माध्यम से समाज में एक सकारात्मक और प्रेरणादायक संदेश भी प्रसारित किया।

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