
प्रयागराज। इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ बेंच ने हुक्का बार संचालकों को बड़ा झटका देते हुए साफ कहा है कि हुक्का बार चलाना किसी भी व्यक्ति का मौलिक अधिकार नहीं है। अदालत ने कहा कि जनस्वास्थ्य और सार्वजनिक सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए राज्य सरकार ऐसे कारोबार पर प्रतिबंध लगाने अथवा सख्त नियम लागू करने के लिए पूरी तरह अधिकृत है।
जस्टिस आलोक माथुर और जस्टिस अमिताभ कुमार राय की खंडपीठ ने यह टिप्पणी हुक्का बार संचालकों द्वारा दाखिल याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान की। याचिकाकर्ताओं ने प्रशासनिक कार्रवाई और लाइसेंस संबंधी प्रतिबंधों को व्यापार की स्वतंत्रता का उल्लंघन बताया था, लेकिन अदालत ने उनकी दलीलों को स्वीकार नहीं किया।
कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि हुक्का बारों में तंबाकू और निकोटीन का सेवन होता है, जो लोगों की सेहत पर गंभीर असर डालता है। ऐसे में इसे सामान्य व्यवसाय की श्रेणी में नहीं रखा जा सकता। अदालत ने यह भी कहा कि शराब और जुए की तरह हुक्का बार भी “रेस एक्स्ट्रा कमर्शियम” के दायरे में आते हैं, जिन पर सरकार नियंत्रण या पूर्ण प्रतिबंध लगा सकती है।
हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि संविधान के अनुच्छेद 19(1)(g) के तहत व्यापार की स्वतंत्रता पूर्ण नहीं है और सार्वजनिक हित में सरकार आवश्यक प्रतिबंध लगा सकती है। फैसले के बाद उत्तर प्रदेश में हुक्का बारों पर प्रशासनिक सख्ती और बढ़ने की संभावना जताई जा रही है।

