
भारत के इतिहास में पहली बार, एक राज्य – बिहार, वैश्विक पटरियों पर दौड़ता दिखाई देगा। छपरा के मढ़ौरा से बनेगा डीजल इंजन और दौड़ेगा पूरी दुनिया में! ये है मेक इन इंडिया से ‘मेड इन बिहार’ की ओर ऐतिहासिक छलांग है।मढ़ौरा की वेबटेक लोकोमोटिव फैक्ट्री, अब तक 729 हाई पावर डीजल इंजन बना चुकी है। 4500 HP के 545 इंजन और 6000 HP के 184 इंजन इसी फैक्टरी में बने हैं। जो अब तक भारत की रेल को रफ्तार दे रहे थे। मगर अब बिहार के ये पावरफुल इंजन देश के बाहर भी विदेशी अर्थव्यवस्था को नई रफ्तार देंगे।26 मई 2025 को गिनी के तीन मंत्रियों ने इस संयंत्र का दौरा किया था। और यहीं से हुई 140 इंजन की 3000 करोड़ की डील, जिसे KOMO नाम दिया है।
ये सिर्फ डील नहीं है, ये भारत के सप्लाई चेन में हमारी भूमिका की पहचान है। हम अब ‘मेड इन बिहार, मेक फॉर द वर्ल्ड’ पर काम कर रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 20 जून को आने वाले हैं इसका उद्घाटन करेंगे।ये बिहार का औद्योगिक उठान है। जो अपनी खोई पहचान को फिर से हासिल करने को बेताब है।“226 एकड़ में फैली ये फैक्ट्री सिर्फ इंजन नहीं बनाती, बल्कि रोजगार भी देती है। भारत के महाराष्ट्र, कर्नाटक, दिल्ली और जमशेदपुर जैसे हिस्सों से आते हैं कलपुर्जे, लेकिन अब ग्लोबल डिमांड के साथ बढ़ेगी उत्पादन क्षमता भी।”मढ़ौरा का लोकोमोटिव अब सिर्फ भारत के लिए नहीं, दुनिया के लिए दौड़ेगा। यह है बिहार की नई पहचान होगी। जो टेक्नोलॉजी, टैलेंट और आत्मनिर्भरता का मेल होगी। यही है बिहार का अगला कदम तो अब बिहार गर्व से कह सकेगा, ये इंजन बिहार में बना है।

